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- आज भय नहीं, भयानक गर्जना चाहिए। किंतु हमारे प्रधानमंत्री तो भय पैदा कर रहे हैं। बार-बार कह रहे हैं 26/11 जैसे हमले और हो सकते हैं। देश पर हुए सबसे बड़े आतंकी हमले की पहली बरसी पर आखिर ऐसी चेतावनी क्यों? क्या इसलिए कि यदि फिर पाक कोई नापाक हरकत कर दे तो प्रधानमंत्री कह सकें कि उन्होंने पहले ही कह दिया था! आतंक की फैक्ट्री पाकिस्तान में है। वे पाकिस्तान को डराएं। वैसा तो वे कुछ कर नहीं पा रहे। हां, हमारे बीच जरूर घबराहट फैला रहे हैं।
- कसाब मरा नहीं है। जिंदा ही रहना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगों को ऐसी ही यंत्रणा देनी चाहिए कि उन्हें जिंदगी मुश्किल और मौत आसान लगने लगे। 26/11 पर रामधारी सिंह दिनकर की ये पंक्तियां प्रासंगिक लगती हैं-
तू मौन त्याग, कर सिंहनाद,
रे तपी! आज तप का न काल।
नव-युग-शंखध्वनि जगा रही,
तू जाग, जाग मेरे विशाल।
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