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Why do we have an Aurangzeb Road in Delhi? | || Satyameva Jayate ||
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My wife asked this question yesterday while we were discussing history.
I pondered for a moment but could not come up with a good answer. I also realised that I was not aware of the background to the naming of streets/roads in Lutyens Delhi.
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!! समर्थ हिन्दु, समर्थ हिन्दुस्थान !!;........................!! समर्थ हिन्दुस्थान, समर्थ विश्व !!............................ All the posts on this blog are re-postings and post headings point towards the actual posts.
Wednesday, July 29, 2009
Why do we have an Aurangzeb Road in Delhi? | || Satyameva Jayate ||
Chicken in vegetarian roll, airline in a soup - India - NEWS - The Times of India
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Chicken in vegetarian roll, airline in a soup - India - NEWS - The Times of India
- Onkar Shukla, a resident of Delhi, was returning with his father from Mumbai last week on a GoAir flight G8-375 when he asked for a vegetarian roll for dinner.
- Shulka, who was livid at the goof up, wanted to file a complaint with the cabin crew but alleged that he got no help from them. He also said when he tried to meet the captain of the flight after they landed, the cabin crew were rude and set the security staff upon him.
"After the flight took off, I ordered a veg roll, a product of Cafe Coffee Day, and juice. Before eating, I checked my pack to confirm if it was veg and saw 'VEG' written clearly on the cover. However, while eating I found its taste unfamiliar and when I checked again, I found meat pieces in it. We are staunch Hindu brahmins and it was very shocking," said Shukla.
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नक्सलियों के संरक्षक - Jagran - Yahoo! India - Opinion News
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Jagran - Yahoo! India - Opinion News
- एक जमाने में भारत के नक्सलियों और माओवादियों को प्रोत्साहन लाल चीन से मिला करता था। आज उनके पैरोकार अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में देखे जा रहे हैं।
- सेन रायपुर में न तो डॉक्टर और न ही समाज सेवी के रूप में कभी प्रसिद्ध थे। उनकी गिरफ्तारी पर रायपुर में कोई हलचल नहीं हुई। सारी सरगर्मी दिल्ली, मुंबई, पेरिस और लंदन से चली। साफ है कि अपील करने वाली विदेशी संस्थाओं, व्यक्तियों को किन्हीं समर्थ एजेंसियों द्वारा बताया गया कि विनायक सेन बड़े मानवाधिकार कार्यकर्ता और सेवाधर्मी डाक्टर हैं जिन्हें परेशान किया जा रहा है।
- अब तक भारत में कम से कम तीन नक्सल समर्थक लेखकों, प्रचारकों को रमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया जा चुका है। यह पुरस्कार अमेरिका के प्रसिद्ध रॉकफेलर फाऊंडेशन द्वारा स्थापित एवं फोर्ड फाऊंडेशन द्वारा वित्त पोषित है। यह बात उठती रही है कि ऐसे पुरस्कार एशिया के विभिन्न देशों में सरकार विरोधी, विशेषकर स्थानीय सभ्यता-संस्कृति विरोधी कार्यकर्ताओं को दिये जाते रहे हैं।
- जब विनायक सेन ने चिकित्सा क्षेत्र में कोई शोध नहीं किया, तब उन्हें अमेरिका में ग्लोबल हेल्थ काउंसिल द्वारा चिकित्सा का 'जोनाथन मान पुरस्कार' किस बूते दिया गया? उन्हें सोशल साइंस के क्षेत्र में योगदान के लिए रेवरेंड कैथान पुरस्कार भी मिला। यह समझ से परे है कि नक्सली समर्थकों को ईसाई मिशनरियां किस वजह से पुरस्कृत कर रही हैं? फ्री विनायक सेन कैंपेन चेन्नई की 'पीपुल्स वाच' जैसी संस्था चला रही है, जिसका लगभग पूरा वित्तीय पोषण हालैंड की कैथोलिक आर्गनाइजेशन फॉर रिलीफ एंड डेवलपमेंट जैसे मिशनरी संगठन करते हैं। यही संस्था भारत में हिन्दू विरोधी राजनीतिक अभियान में भी सक्रिय है। विनायक सेन के बचाव में लिखने-बोलने वालों में से कई मुहम्मद अफजल को फांसी से बचाने के आदोलन में भी थे। नक्सलियों व आईएसआई के बीच संबंध की खबरे भी पिछले दस वर्ष से सामने आती रही हैं।
- एस.शकर : लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं
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visfot.com । विस्फोट.कॉम - भारतीय कृषि पर अमेरिकी कब्जे की कहानी
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- कमलाकर दुवुरू
- भारत में भले ही इसका महत्व कम हो रहा हो लेकिन अर्थव्यवस्था का मूल आधार खेती ही है, इसे कम से कम दुनिया की बहुराष्ट्रीय कंपनियां समझने लगीं हैं. लेकिन उनकी इस समझ और पहल का एक आधार और है. एग्रीबिजनेस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लाभ का माध्यम भी है. रोग और रोग का निदान निश्चित रूप से दुनिया का सबसे अधिक लाभ कमानेवाला उद्योग बना हुआ है.
- शरद पवार के साथ पूसा इंस्टीट्यूट में अमेरिकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन
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visfot.com । विस्फोट.कॉम - शर्म अल शेख का असली संदेश
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- संजीव पाण्डेय
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संजीव पाण्डेय का विश्लेषण-
कांग्रेस से अलग प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्वतंत्र वजूद बनाने की कोशिश में है। वे सोनिया गांधी के रबर स्टैंप है, इस मिथक को खत्म करने की कोशिश में लग गए है। कम से कम कांग्रेस और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच उठ रहे विवाद को अलग चश्मे से देख रहे लोगों को यह जरूर समझना चाहिए। शर्म अल शेख में भारतीय और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का ज्वाइंट स्टेटमेंट इसी दिशा में चल रहे कवायद की एक कड़ी है।
- निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री अमेरिकी दबाव में तो काम करना चाहते है, पर कांग्रेस के दबाव में वे काम नहीं करना चाहते है। अमेरिकी दबाव में ज्यादा वो सुरक्षित महसूस करेंगे। अगर अमेरिका का वरदहस्त उनके उपर है तो बचाव रहेगा और इसमें कांग्रेस भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी।
- प्रधानमंत्री कहीं न कहीं यह बरदाश्त नहीं पा रहे है कि कई मसले पर उनसे ज्यादा सोनिया गांधी प्रणव मुखर्जी, एके एंटोनी और अहमद पटेल पर विश्वास करती है। समय-समय पर कई नीतिगत फैसले में उपरोक्त तीन नेताओं की सलाह प्रधानमंत्री को माननी पड़ती है। शर्म अल शेख की घटना के बाद ही उपरोक्त तीन नेताओं के साथ ही सोनिया गांधी ने बैठक की। बैठक के बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को मैसेज दिया जिसमें अपनी मर्जी से प्रधानमंत्री के फैसले पर नाराजगी व्यक्त की।
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