Sunday, August 30, 2009

Jagran - माओ विचारधारा पर बरसे योगी

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    • बहराइच/श्रावस्ती
    • दोनों जिलों में आयोजित हियुवा के जिला स्तरीय सम्मेलनों को संबोधित करने आए सांसद योगी आदित्य नाथ के निशाने पर माओवादी भी रहे और धर्मनिरपेक्षता वादी भारतीय भी। उन्होंने इस दौरान कड़े प्रहार करते हुए कहा कि धर्मनिरपेक्षता की आड़ में हिन्दू धर्मस्थल और विचारधारा के विरुद्ध रचा जा रहा षड्यंत्र कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
    • उन्होंने कहा कि बहराइच और श्रावस्ती जनपद की पहचान किसी आक्रांता के नाम पर न होकर महाराजा सुहेलदेव और बालाकृष्णन तथा पूरी दुनिया में अपने विचारधारा को लेकर विख्यात हुए महात्मा बुद्ध के नाम पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ के मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रवेश के दौरान अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों को आरक्षण दिलाए जाने का प्रयत्‍‌न किया जाना चाहिए।

Jagran - इतिहास का निरादर

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    • हिंदुओं की हत्याओं के बारे में चर्चा नहीं की गई, किंतु महात्मा गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं में पंथनिरपेक्षता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के कूट-कूट कर भरे गए विचारों के कारण भारत में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए कठोर उपाय किए गए।

      ये ऐतिहासिक तथ्य हैं, जिन्हें भली प्रकार शब्दों में कैद किया जा चुका है।

    • भारत में 1947 में मुसलमानों की 3.5 करोड़ आबादी थी, जो अब बढ़कर 15 करोड़ पहुंच गई है। हम पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक संविधान से बंधे हैं, जो सभी नागरिकों के लिए समता और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है। वास्तव में हम इतने पंथनिरपेक्ष हैं कि 2004 से अनेक महत्वपूर्ण पदों पर, जिनमें प्रधानमंत्री पद भी शामिल है, गैर-हिंदू तैनात हैं।
    • जसवंत सिंह के इस कथन से झटका लगता है कि जो मुसलमान भारत में रहे या यहां से निकल नहीं पाए वे खुद को अलग-थलग पाते हैं। ये शेष लोगों से संबंध में खुद को कहीं नहीं पाते। इस कारण वे मनोवैज्ञानिक असुरक्षा के भाव से घिर गए हैं।
    • यह बिल्कुल गलत सोच है। जसवंत सिंह और भी शरारत करते हैं। वह मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग को हवा देते हैं। उनका कहना है-''..1909 में आरक्षण और फिर विभाजन का सिद्धांत स्वीकारने के बाद अब हम इसे औरों को देने से कैसे इनकार कर सकते हैं, यहां तक कि उन मुसलमानों को भी, जो यहां रह गए या जिन्होंने यहां रहना उचित समझा। इसीलिए अब मुस्लिम विरोध की कुछ आवाजों में तीसरे विभाजन की बात उठ रही है..''। संक्षेप में, जसवंत सिंह की इस व्याख्या में भयानक खामियां हैं। वह जिन्ना से इतने अभिभूत हैं कि उन्होंने नेहरू को विभाजन के मुख्य वास्तुशिल्पी का दर्जा दे दिया है। वह तब फिर से नेहरू और पटेल की अवमानना करते हैं, जब यह कहते हैं कि तत्कालीन नेताओं के मंतव्यों से वह हैरान रह गए। उनकी जिन्ना के प्रति सहानुभूति और नेहरू, पटेल व अन्य कांग्रेस नेताओं के प्रति दुराग्रह हमारे पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक आदर्र्शो का निरादर है। वह पंथ आधारित घृणा फैलाने वालों से सहानुभूति जताते हैं। जसवंत सिंह की यह दलील खतरनाक है।
    • इतना ही हैरतअंगेज जसवंत सिंह का यह दावा है कि पाकिस्तान का रुख अब विनम्र और अनुग्राही हो गया है। वह भूल गए कि पाकिस्तान भारत को हजार जख्म देने की नीति पर अभी भी चल रहा है। मुंबई पर किया गया आतंकी हमला इसका ताजा उदाहरण है।
    • [ए. सूर्यप्रकाश: लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं]

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Cross Cultural traces of Vedic Civilization « Hindu focus

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    • by Sadaputa das (Dr Richard L. Thompson)

      1991 The Bhaktivedanta Book Trust.

    • According to the Vedic system, the lengths of the Satya, Treta, Dvapara, and Kali yugas are 4, 3, 2, and 1 times an interval of 432,000 years. Within these immense periods of time the human life span decreases from 100,000 years in the Satya-yuga to 10,000 years in the Treta-yuga, 1,000 years in the Dvapara-yuga, and finally 100 years in the Kali-yuga.  
    • Although the Bible is well known for advocating a very short time-span for human history, it is interesting to note that it contains information indicating that people at one time lived for about 1,000 years.

100 days of UPA’s second innings « Hindu focus

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    • You can’t miss the irony when a government completing its five years in office claims to set right in the next 100 days of its new tenure what it could not do in five years! Well, in this particular and peculiar case, the party in question has governed this country for nearly 54 out of its 62 years of Independence. Yet, the ever gullible voter gets taken in by a 100 days promise!
    • The late Sharad Joshi, the famous Hindi satirist, once said in the 1980s when Rajiv Gandhi was the prime minister, ‘Do not think that this country is being run by Rajiv Gandhi or by Indira Gandhi or Lal Bahadur Shastri or Nehru. It’s just running and will keep on running Ram Bharose (at God’s mercy).’ Sounds true. Isn’t it?

      Anupam Trivedi