Sunday, January 31, 2010

महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों की ढाल बनेगा संघ-नैशनल-भारत-Navbharat Times

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    • जबलपुर।।
    • महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा के मुद्दे पर शिवसेना और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस)आमने-सामने आ गए हैं। आरएसएस
      ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र में शिवसेना व एमएनएस की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी और संघ के स्वयंसेवक उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा का विरोध करेंगे।

      उत्तर भारतीयों पर हमले के बावजूद हिंदू एकता की बात करने वाले संघ की चुप्पी को लेकर स्वयंसेवकों में काफी समय से बेचैनी महसूस की जा रही थी। संघ की जड़ें भले ही महाराष्ट्र में हो लेकिन उसकी शाखाओं को बल हिंदी पट्टियों से ही मिलता है।
    • संघ ने अब अपने स्वयंसेवकों को हिंदी भाषियों और उत्तर भारतीयों की रक्षा के लिए आगे आने का निर्देश दिया है।

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Jagran - Yahoo! India - मारा जा रहा हिंदुओं का हक: तोगड़िया

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    • बरेली।
    • उन्होंने हिंदुओं को ललकारते हुए कहा,'जैसे जीवन सुरक्षा के लिए बीमा कराते हो, वैसे ही धर्म रक्षा के लिए धर्मरक्षा निधि में अपना खाता बनाओ। यहां रोज एक रुपये जमा करो। बड़े व्यापारियों को भी अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा इसमें अंशदान करना चाहिए। यही धन हिंदू धर्म की रक्षा के काम आएगा। इसी धर्म से हिंदुओं का सम्मान स्वाभिमान सुरक्षित रहेगा।' डा. तोगड़िया ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के संघर्ष में जो लोग जेल जाएंगे, उनके लिए विहिप संघर्ष करेगी। उनके परिवार को राशन-पानी तक की व्यवस्था करेगी।

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राष्ट्र बड़ा या पिता पुस्तक की बिक्री पर रोक लगे :: सहारा समय

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    • राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पुस्तक ‘राष्ट्र बड़ा या पिता' की बिक्री पर तुरन्त रोक लगाने और पुस्तक के लेखक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिररफ्तार करने की मांग की है।
    • जयपुर
    • गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी के जयपुर के एक पार्षद अखिलेश दुबे द्वारा पुस्तक ‘राष्ट्र बड़ा या पिता' का लोकार्पण विश्व हिन्दू परिषद के डा. प्रवीण भाई तोगडिया ने किया था।

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प्रीस्ट नहीं बनना चाहता था युवक

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    • झागरिया के सेंट टेरेसा चर्च परिसर में फांसी लगाने वाला छात्र प्रीस्ट नहीं बनना चाहता था। ये खुलासा उसके रूममेट ने शनिवार को पुलिस को दिए बयान में किया। पुलिस ने शनिवार को दोबारा छात्र के कमरे की तलाशी ली।



      चर्च परिसर में बने टेनिस कोर्ट में एशु बाबू उर्फ वेणुकुमार ने गत दिवस फांसी लगा ली थी। शनिवार को पुलिस दोबारा चर्च में गई। वेणु के रूममेट ने कहा कि वेणु ने बातचीत के दौरान उससे तीन-चार बार जिक्र किया था कि वह प्रीस्ट नहीं बनना चाहता है। पुलिस को वेणु के कमरे से उसके पिता द्वारा चर्च के फादर थॉमस वर्गीस को लिखा पत्र भी मिला। इसमें उनके बेटे को चर्च में एडमिशन देने की सिफारिश की गई है।



      हिंदू संगठनो का आरोप: बजरंग दल और संस्कृति बचाओ मंच के एक दर्जन कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वेणु पर प्रीस्ट बनने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने चर्च के फादर के खिलाफ वेणु को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला दर्ज करने की मांग की।

    • भोपाल.

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मेरी बात: धीमे जहर का घूंट, कब तक! on सहारा समय

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    • sanjeev srivastava
    • नतीजा यह है कि अब इन दो भाइयों की होड़ में एक के बाद एक आज की मुम्बई का प्रत्येक आधुनिक, लोकप्रिय और सही बात करने वाला नायक, ठाकरे बुंधुओं के जैसे निशाने पर हैं।

      खेल शुरू किया राज ठाकरे ने। मराठी बनाम गैर-मराठी मामले को हिंसक हवा दी, माहौल को विषैला बनाया और भारत के सबसे बड़े शहर को जैसे बंदूक की नोक पर घुटने टिकवा दिये। शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को उनकी राजनीतिक जगह दिखाने और आधिकारिक शिवसेना को कमजोर करने के लिए कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने राज ठाकरे का कमोवेश वही इस्तेमाल किया जो कभी कांग्रेस ने पंजाब में अकालियों से निबटने के लिए भिंडरावाले का किया था।

      सरकारी शह पर राज ठाकरे ने कभी अमिताभ बच्चन तो कभी बिहारियों तो कभी सभी उत्तर भारतीयों को निशाना बनाया।

      उद्धव कुछ स्वभाव और सोच से शालीन रहे तो लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी निबट गई।
    • इन दिनों असल जहर उगल रहे हैं बाला साहब। कभी सचिन तेंदुलकर उनका निशाना होते हैं तो कभी मुकेश अंबानी। कभी शाहरूख को वह चुनौती भरे अंदाज में सचेत करते हैं और धमकाते हैं तो कभी उनके शालीन, मृदुभाषी पुत्र सैफ अली खान को टपोरी कह सार्वजनिक रूप से हड़काते हैं।
    • पर इस ‘कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना’ की राजनीति में हमारा समाज एक ऐसे दलदल में फंसता जा रहा है जहां से अगर कभी निकलना नहीं हो पाया तो लेने के देने पड़ सकते हैं।

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