Saturday, May 23, 2009

राज ठाकरे जी, ये क्या हो रहा है??

राज ठाकरे जी, ये क्या हो रहा है??

जब से राज ठाकरे ने "मराठा वाद" का राग छेड़ा है तब से मैं मुंबई में चलने वाली हवाओं में एक अजीब सा परिवर्तन देख रही हूँ। चुनावों में राज ठाकरे की पार्टी का जिस तरह सुपडा साफ हुआ वो तो खैर होना ही था लेकिन उसके पहले ही टेलिविज़न जगत ने जैसे कसम खा ली थी की अब सारे उत्तर-पूर्वी भारत को मुंबई में ला बसाना है। नतीजतन एकाएक बिहारी, पंजाबी, गुजरती, हरयाणवी, बंगाली कहानियों का एक हजूम सा टेलीविजन धारावाहिकों में उमड़ पड़ा है।

Perverse Police bows before criminals and beats patriots

Perverse Police bows before criminals and beats patriots


Pune (Maharashtra): Pune Police beaten up four workers of HJS, who were gone o lodge complaint against denigration of National Flag. Same Police adopted very lenient & plaint policy in case of abduction & ransom case against Javed Shaikh of NCP.

सोनिया गाँधी का छोटा और घटता कद !

सोनिया गाँधी का छोटा और घटता कद !

जी हाँ ये राजनीती की एक हकीकत यह भी है. आज भ्रम रह जाये पर सचाई यह है की सोनिया और राहुल गाँधी का कद बहुत ही छोटा होगया है.

आज जो लोग सोनिया और राहुल की जय कर रहे है हकीकत उनको भी पता है की झूटी जय जयकार है यह.

इसमें
बहुत सारे पेंचहै. देखिया एक बात तो बहुत ही स्पष्ट है की बहुमत किसी भी प्रकार से सोनिया या राहुल को तो बिलकुल ही नहीं मिला है. बहुमत मिला हैं सरदार मनमोहन सिंह को. इस बात की पुष्टि बहुत सारे तथ्यों से होती है जैसे -
  • कांग्रेस के लिया २००४ में मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाना मज़बूरी था तो अब कांग्रेस सत्ता मेंपहेले से अधिक सक्षम बनके आई है तो अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह क्योँ? यदि पहेले मालूम होता तो राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस लड़ती. इस बात का कांग्रेस को बहुत ही अफ़सोस हैं. और अपने ही बनायेजाल में खुद फंस गई. मेरी इस बात की पुष्ठी इस बात से भी होती हैं की आज कैबिनट में मंत्रियो का चुनावप्रधानमंत्री के पास है सोनिया तो बस दिखा रही हैं की उसीका निर्णय हैं. कांग्रेस आज अपने को बहुत हीमजबूत परन्तु गाँधी परिवार अपने को बहुत ही हीन और कमजोर महेसुस कर रहा है. जो खेल कल तक सोनिया और गाँधी परिवार मनमोहन सिंह के साथ खेलता था आज होनी देखिया वोही सोनिया के साथ होगया. इसिलिया कहेते है की ऊपर वाले की लाठी बेअवाज होती हैं.
  • सोनिया तो मनमोहन को हरा हुआ उमीदवार मानकर चुनाव लड़रही थी. अब रपट गए तो हर हर गंगे. इसकी पुष्टि सोनिया की भावः भंगिमाये और चेहरे की उदासी साफ़ बयां कर रही है.क्या चेहरे पर वो २००४ वाली चमक है। नही कतई भी नही।

सरदार मनमोहन सिंह पुरे अधिकार से सरकार चलाने को
उतावले है. और येही आत्मविश्वाश सोनिया के लिया चिंता का विषय है.
आज सोनिया के वो त्याग की देवी के छवि भी नहीं है और हर तरफ सिंह इस किंग का ही नशा है।

अब
पांच साल में सब वो करना पड़ेगा अपने ही हाथो से जो गाँधी - नेहेरू राजवंश के सर्वशक्तिमान प्रतिनिधि अपनेआप नहीं करना चाहेगा.
यदि इस परिवार को देश के विकास की इतनी ही चिंता होती तो ६० साल में होगया होता.

कार्टून :मैडम को साक्षि मान कर

कार्टून :मैडम को साक्षि मान कर

The Stealth Revolutionary

The Stealth Revolutionary


a piece on the remarkable turnaround of Bihar by Nitish Kumar. From The Stealth Revolutionary:

NITISH KUMAR’s success in beginning Bihar’s turnaround in the three-and-a-half years he has been in power is largely credited to three factors, the most important of which is the control of organised crime. For a state whose politicians had long embraced as comrades-in-arms pathological killers and mafia dons running extortion and kidnapping rackets, Nitish Kumar surprised everyone by going after organised crime, no matter how highly connected.

Thousands of criminals were arrested and prosecutions launched. Fast track courts were set up across the state to conduct speedy trials through daily hearings to deliver justice quickly. In just the two years of 2006-08, Bihar’s courts convicted as many as 30,000 criminals — an unprecedented statistic marveled at by even the most hardened cynic in the state. Astonishingly, nearly 6,000 criminals were given life sentences, mostly in cases of murder. Even more stunning is that the courts have ordered nearly 90 death sentences since 2006.

“The life of crime in Bihar is a thing of the past,” the Chief Minister grandly declares. “It is never going to come back.”

Read it in full here.

BJP's mantra: Sit tight, do nothing!

BJP's mantra: Sit tight, do nothing!


Rajnath Singh has ruled out any formal, structured inquiry into the BJP's pathetic performance. Instead, according to him, leaders will 'quietly' visit constituencies and get 'reports from the ground'. And then the party will 'quietly' bury the findings of those sent to snoop and sniff around.

The last time the BJP did any honest introspection and made an effort to study the party's performance in a general election was after the 1984 poll when the BJP was reduced to two seats. That report helped the party to strategise and leap frog to the frontline of Indian politics. Others may have forgotten about that report, surely LK Advani hasn't.

The lotus-eaters are content to dream of 2014...

5 Rupees, Millions of Lives

5 Rupees, Millions of Lives

We need to work for the welfare of India. We talk about projects worth millions of rupees. Sure, they are needed. But there are thousands of things that can be done for our Motherland for far less. So less that it is embarrassing even to speak of the small amounts involved.