Wednesday, July 8, 2009

» Blog Archive » कारगिल में हमला बचाया जा सकता था

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    • आलोक तोमर
    • 25 अगस्त 1998 को 121 ब्रिगेड के मेजर आर के द्विवेदी ने सेना प्रमुख को एक पत्र लिखा था। तत्कालीन सेना प्रमुख वीपी मलिक कारगिल के दौरे पर आने वाले थे और इस पत्र में बयालीस तर्क थे और उनके साथ नक्शे और फोटो भी लगे थे। सेना के लहजे में लिखे गए एक पत्र में साफ लिखा था कि पाकिस्तान पोखरण द्वितीय के बाद और शार्क देशों की 29 जुलाई की बैठकों के बाद आतंकवादियों को और सैनिकों को कारगिल इलाके में बड़े पैमाने पर भेजने वाला है।
    • मेजर जनरल वी एस बधवार उन दिनों लेह में चिड़िया घर बनाने में लगे हुए थे और सैनिक अधिकारियों को जंगली जानवर पकड़ कर लाने के लिए कह रहे थे।

      मेजर के वी एस खुराना ने भी चेतावनी का पत्र लिखा था और यह सब सेना के रिकॉर्ड का है। फिर जब कारगिल में वह सब हो गया जिसकी चेतावनी दी गई थी और हमारे बहुत सारे जवान और अधिकारी मारे गए तब किसी पर तो इल्जाम मढ़ना ही था और भारतीय सेना कानून के तहत सुरेंद्र सिंह पर ही मुकदमा चला दिया गया।

    • बाहर किसी को कानों कान खबर नहीं हुई और बजरंग पोस्ट खाली करने के मामले में लापरवाही बरतने के मामले में उन्हें सेना से बर्खास्त कर दिया गया। कारगिल की असफलता के कारणों की जब एक जांच समिति द्वारा पड़ताल की गई तो देश के सुरक्षा हिताें को बहाना बना कर इस रिपोर्ट को परम गोपनीय बनाए रखा गया। कारगिल पाकिस्तान की शैतानी, हमारे जवानों के पराक्रम और हमारी रक्षा नीतिया बनाने वालों की राष्ट्रीय शर्म भी है।

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