Thursday, December 17, 2009

मुझे फौज में जाना है : रुखसाना कौसर

  • tags: no_tag

    • वह दुबली-पतली जरूर हैं, लेकिन मजबूत हौसलों वाली हैं। जी हां, रुखसाना कौसर से मिलकर कतई विश्वास नहीं होता कि आतंकवाद से त्रस्त जम्मू-क
      श्मीर के छोटे से कस्बे की इस शर्मीली युवती ने खूंखार आतंकवादी को दबोचकर उसी की एके-47 से मौत के घाट उतार दिया होगा। हाल ही में रुखसाना से हमारी खास बातचीत हुई :
    • लेकिन लोग हमसे मिलने से डरते हैं। और तो और, कोई हमारे साथ फोटो भी नहीं खिंचवाता कि अगर उग्रवादियों ने फोटो देख लिया तो मार डालेंगे। आपको बताऊं, घर से जब दिल्ली के लिए चली थी तो जम्मू तक आने को कोई टैक्सी वाला तैयार नहीं था।
    • सरकार ने आपको बहादुरी का पुरस्कार तो दिया?
      हमें पुरस्कार नहीं, नौकरी चाहिए। मैं फौज में जाना चाहती हूं, देश की सेवा करना चाहती हूं। सरकार ने नौकरी की पेशकश जरूर की थी, लेकिन वह महज 89 दिनों की नौकरी थी, इसलिए हमने ठुकरा दी। अगर देनी है तो परमानेंट नौकरी दो और फौज की नौकरी दो।

Posted from Diigo. The rest of my favorite links are here.