Sunday, May 23, 2010

|| Satyameva Jayate || » . » Largest ever regularisation of illegal immigrants anywhere in the world?


Census Nationality Clause
    • That is, when the citizenship rules ask for doubtful cases of citizenship to be identified, the census manual to collect details under the very citizenship rules virtually says ‘don’t doubt the respondents on their claim of nationality; just record what they say.’

      How then will suspect cases of citizenship be discovered?


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visfot.com । विस्फोट.कॉम - 3जी की सफलता बड़ी या 2जी का घोटाला?

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    • बालेन्दु शर्मा दाधीच
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    • केंद्र सरकार अब इस सवाल का जवाब देने से बच नहीं सकती कि आखिर क्या कारण थे कि जहां 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में लगभग सत्तर हजार करोड़ रुपए की रकम हासिल हुई वहीं कुछ 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन से महज 10772 करोड़ रुपए ही प्राप्त हुए? इतनी जबरदस्त आर्थिक संभावनाओं से युक्त 2जी स्पेक्ट्रम को कौड़ियों के भाव कैसे बेच दिया गया?
    • राज्यसभा के रिकॉर्ड में मौजूद इस बयान से साफ है कि श्री राजा चाहते ही नहीं थे कि सरकार 2जी स्पेक्ट्रम के लिए अधिक से अधिक कीमत वसूल करे। उनकी यह दलील कि कम कीमत पर स्पेक्ट्रम दिए जाने से टेलीफोन सेवाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगी, बेदम है क्योंकि जिन कंपनियों ने 2जी स्पेक्ट्रम लिए उन्होंने तो इसे कई गुना कीमत पर दूसरी कंपनियों को बेच दिया। यदि वही रकम सरकार को मिलती तो वह गलत कैसे होता?

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visfot.com । विस्फोट.कॉम - 'हादसे' से हादसे तक का सफर...

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    • संतोष कुमार
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    • नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने 15 मई को जब मंगलोर हवाई अड्डे के इस रन-वे का उद्घाटन किया था, तो खुद से आगे बढ़कर माना था, अभी रन-वे की लंबाई अंतर्राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक नहीं, सो अंतर्राष्ट्रीय विमानों के उड़ान भरने और उतरने के हिसाब से तैयार करने के लिए एक हजार फीट लंबाई बढ़ानी होगी, जिसके लिए वह सौ करोड़ की योजना मंजूर कर रहे हैं। अब हफ्ते भर बाद ही हादसा हो गया, तो सवाल, क्या रन-वे में सुधार के लिए इस हादसे का इंतजार था?

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visfot.com । विस्फोट.कॉम - शैतानों के हवाले स्वास्थ्य सुरक्षा

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    • उमेंद्र दत्त
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    • हाल ही में रूस में जीएम सोयाबीन के चूहों पर हुए प्रयोगों की रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट बताती है कि जीएम फसलें मनुष्यों के खाने के लिए कतई सुरक्षित नहीं हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आयी है जब भारत में जीएम फसलों को जनता पर जबरदस्ती थोपने की भरसक कोशिश की जा रही है। यह प्रयास करने वालों में सरकार के कुछ मंत्रालय, जीएम बीज उत्पादक कम्पनियां, कृषि वैज्ञानिक, नौकरशाह और देश की भूख मिटाने की नौटंकी में शामिल योजनाकार और अर्थशास्त्रियों तथा मीडिया के एक खासवर्ग के शतुरमुर्ग शामिल है।
    • रूस में हुए इस अध्ययन से पता चलता है कि जीएम सोयाबीन खाने वाले स्तनपाईयों की तीसरी पीढ़ी नंपुसक हो गई है। यह प्रयोग किया है रशियन अकेडमी आफ साईंस के एक इंस्टीच्यूट आफ इकोलोजी और नेशनल एसोसियशन आफ जीन सिक्यूरिटी ने मिलकर। जीव विज्ञानी डॉ. एलेक्सी सूरोव इस प्रयोग के कर्ताधर्ता थे।
    • डॉ. सूरोव का यह भी कि इन दुष्प्रभावों के पीछे जीएम सोयाबीन की फसल पर छिड़के गए खरपतवारनाशक राऊंडअप भी एक कारक हो सकता है। क्योंकि यह जीमए सोयाबीन ‘राऊंडअप रेडी सोयाबीन’ था। उल्लेखनीस है कि आज पूरी दुनिया में राऊंडअप रेडी सोयाबीन एक प्रमुख जीएम फसल है। जिसकी निर्माता अमरीकी कम्पनी मोनसेंटो है। ‘राऊंडअप रेडी सोयाबीन’ऐसी जीएम फसल है जिसपर खरपतवारनाशकों का असर नहीं होता। इस जीएम किस्म को विकसित करने के पीछे तर्क है कि खरपतवारों को नियंत्रण करने के लिए गुढ़ाई करने के लिए काफी मेहनत लगती है।हाथ से की जाने वाली गुढ़ाई के लिए काफी मजदूर चाहिए होते हैं। इसलिए सोयाबीन में एक ऐसा जीन डाल दिया गया है जो भयानक जहरीले राऊंडअप खरपतवारनाशक से प्रभावित नहीं होता। मजदूरी बचाने के नाम पर भोजन ही जहरीला कर देने वाली विनाशकारी तकनीक को आप क्या कहेंगे?

      यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यह वही ‘राऊंडअप खरपतवारनाशक’ है जिसका उपयोग अमरीका ने वियतनाम युद्ध में किया था। अमरीकी वायुसेना ने जंगल में छिपे वियतनामी सैनिकोें पर इसका सैनिक प्रयोग किया था। तब अमरीकी वायुसेना जंगल में वियतनामी सैनिक ठिकानों को निशाना बनाना चाहती थी। परन्तु घने जंगलों में उसे ठिकाने ढूंढने में दिक्कत आती थी। अतः जंगल को ही नष्ट कर करने के लिए हवाई जहाजों से राऊंडअप का छिड़काव किया गया। तब इसे ऐेजंेट ओरेंज का गुप्त नाम दिया गया था। यह 1967-68 की घटना है।

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visfot.com । विस्फोट.कॉम - मंदिरों का अधिग्रहण करना चाहती है महाराष्ट्र सरकार

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    • वैसे, सच यह है कि मुंबई का सिद्धि विनायक मंदिर और शिर्ड़ी का सांई बाबा मंदिर महाराष्ट्र के सीधे कब्जे में हैं। इन दोनों ही बहुत बड़े मंदिरों की कमाई का सरकार जमकर अपने हक में उपयोग करती रही है। साफ लग रहा है कि सरकार को अब बाकी मंदिरों को भी अपने कब्जे में लेकर उनकी कमाई को अपने हक में खर्च करने का लालच सता रहा है. यही वजह है कि सरकार प्रदेस के दो लाख मंदिरों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की फिराक में है। हालांकि सरकार के हाथ में जिन दो मंदिरों का संचालन है, उनकी हालत सरकार ने क्या कर रखी है, यह महाराष्ट्र की आम जनता अच्छी तरह जानती है।
    • भाजपा विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा और शिवसेना की विधायक नीलम गोरे ने सरकार  के इस प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया है। विधायक लोढ़ा ने कहा है कि सरकार को अगर महाराष्ट्र में फैल रहे भ्रष्टाचार की इतनी ही चिंता है तो सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार तो पुलिस और मंत्रालय में है, इनको भी मंदिरों की तरह किसी ट्रस्ट को सौंप देना चाहिए।

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