Tuesday, June 23, 2009

» Blog Archive » भूख और बीमारी से हार गया वीर सैनिक

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    • सुप्रिया रॉय
      डेटलाइन इंडिया
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    • एक सैनिक ने भारत के लिए तीन युद्व लड़े, हर बार अपना जीवन दांव पर लगाया और वीरता के लिए कई पदक जीते।
    • राधेश्याम तिवारी नाम के इस बहादूर सैनिक अधिकारी की 75 साल की उम्र में मध्य प्रदेश के मंदसौर में जब लंबी बीमारी के बाद मौत हुई तो उसके परिवार के पास अस्पताल का बिल चुकाने के पैसे नहीं थे और उसका अंतिम संस्कार भी चंदे से किया गया। तिवारी का पेंशन का मामला बहुत समय तक लटका रहा और जब पेंशन मिली तब तक उधार इतना जमा हो गया था कि मौत तक चुकाया नहीं जा सका।
    • 1971 की भारत-पाक लड़ाई में श्री तिवारी की वीरता को देखते हुए उन्हें एक या दो नहीं वीरता के सात पदक मिले थे। उस युद्व में वे बुरी तरह घायल भी हो गए थे। इसी वजह से रिटायर होने के बाद वे कहीं काम भी नहीं कर सके। उनकी जमीन लोगों ने हड़प ली और अदालत में मुकदमा लड़ने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। यह जमीन भी वह थी जो खुद सरकार ने उनकी वीरता का सम्मान करते हुए दी थी। 12 बीघा जमीन थी और इसके एक इंच हिस्से पर भी श्री तिवारी कभी खड़े नहीं हो पाए।
    • नई दिल्ली में जब सेना मुख्यालय में इस संबंध में संपर्क किया गया तो बताया गया कि गलती सारी श्री तिवारी की थी। उन्हें दिल्ली आ कर अपील करनी चाहिए थी। श्री तिवारी ने इंदौर के पास महू स्थित छावनी के जरिए कई बार अपील की थी मगर उन्हें बुलाया तक नहीं गया। पेंशन बहुत समय बाद मिली और पिछले वर्षों की पेंशन अदा करने की अर्जी तो आज भी विचाराधीन है। एक बहादूर सैनिक को सताने वालों की दया की अर्जी पर भगवान ही फैसला करेगा।

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