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धर्म संस्कृति की रक्षा हेतु कार्य आवश्यक :: प्रेसनोट डाट इन | आपकी भाषा आपकी खबरें
- उदयपुर,
- स्थानीय बाईजी राज के कुण्ड पर नेपाल स्थित वाराह सिद्ध क्षेत्र आचार्य निम्बाकाचार्य सम्प्रदाय के आचार्य पीठाधीश्वर मोहनशरण आचार्य के उदयपुर आगमन पर स्वागत एवं संत मिलन समारोह आयोजित किया गया।
इस अवसर पर आचार्य ने कहा कि धर्म एवं संस्कृति की रक्षा अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए स्वयं को आगे लाकर ज ��टना होगा तभी आफ पीछे समाज जुड पाएगा। उन्होंने बताया कि जब तक बालक वैदिक, पौराणिक, इतिहास की महत्ता नहीं जान पाएगा तब तक हिन्दू संस्कृति एवं हिन्दू राष्ट्र को गौरवपूर्ण नहीं बनाया जा सकता क्योंकि बालक की भावी पीढी होती है और इसी कारण हमने नेपाल में वैदिक ज्ञान पाठशाला के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक संस्थान चला कर प्रयास किया है जो आगे भी राधा-रानी की कृपा से चलता रहेगा। - नेपाल के ही संत कृष्णदास ने कहा कि नेपाल एवं भारत कभी अलग नहीं थे। दोनों की संस्कृति एक ही है क्योंकि भगवान सालिगराम की उत्पत्ति नेपाल में होती है और पूजा भारत में होती है।
- कार्यक्रम अध्यक्ष कुंड मंदिर के पीठाधीश मोहन वल्लभ आचार्य ने कहा कि हम सभी राम की संतान होने के कारण नेपाल हमारा ननिहाल है और ननिहाल से आने वाले हमारे नाना-मामा कहलाते है अर्थात् पीठाधीश्वर हमसे भिन्न नहीं है वह भारत और नेपाल दोनों के बीच हिन्दू संस्कृति को जागृत करने की कडी भारत भ्रमण पर निकले जो आज हमारे बीच में उपस्थित है। अतिः भगवान नवनीतराय की कृपा से नेपाल पुनः हिन्दू राष्ट्र बनें और हिन्दू धर्म की ज्योति अखण्ड बनें। यही हमारी कामना है।
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Wednesday, October 14, 2009
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Comments by IntenseDebate
धर्म संस्कृति की रक्षा हेतु कार्य आवश्यक :: प्रेसनोट डाट इन | आपकी भाषा आपकी खबरें
2009-10-14T20:39:00+05:30
Common Hindu