Monday, April 26, 2010

महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar): सैयद अली शाह गिलानी की दो हरकतें – केन्द्र की पिलपिली सरकार को सरेआम चुनौती…… Syed Gilani, Terrorism in Kashmir, Afzal Guru

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    • बीते पखवाड़े अली शाह गिलानी ने “कांग्रेस की कृपा से अब तक जीवित”, तिहाड़ जेल में बन्द संसद पर हमले के देशद्रोही अफ़ज़ल गुरु से “व्यक्तिगत मुलाकात” की। वजह पूछे जाने पर गिलानी ने बताया कि अफ़ज़ल गुरु से वह इसलिये मिले, क्योंकि उन्हें लगता है कि गुरु निर्दोष है… (यानी भारत की सुप्रीम कोर्ट बेवकूफ़ है)। सारे कश्मीरी मुसलमान निर्दोष और मासूम ही होते हैं, यह गिलानी का पक्का विश्वास है, क्योंकि दिल्ली के लाजपतनगर में हुए बम विस्फ़ोटों के लिये दोषी पाये गये कश्मीरी युवकों को “नैतिक समर्थन”(?) देने के लिये उन्होंने तड़ से घाटी में एक और आम हड़ताल भी करवा ली।
    • गिलानी पिछले कुछ हफ़्ते दिल्ली में “विशिष्ट मेहमान” की तरह दिल्ली में ठहरे (यहाँ रुकने-खाने-पीने का खर्च किसने उठाया, मुझे पता नहीं)। यहाँ गिलानी ने एक तमिल कॉन्फ़्रेंस(?) को संबोधित किया (गिलानी का तमिल कॉन्फ़्रेंस से क्या लेना-देना है, कोई मुझे समझायेगा?), तथा अफ़ज़ल गुरु के बाद तिहाड़ जेल में बन्द अन्य कश्मीरी “गुमराह” युवकों से भेंट की।

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