Friday, May 28, 2010

Hindi.Hindu.Hindusthan: भारतीय स्वतंत्रता के जनक(fathar of indian independece)

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    • "वीर सावरकर की पीढ़ी में उनके समान प्रभावी, साहसी,ढ्रद,देशभक्त भारतवर्ष में पैदा नही हुआ है। सावरकर ने जो कष्ट सहे हैं,उसी के फलस्वरूप भारत ने स्वाधीनता प्राप्त की है। आदर्श सिधांतों को निभाने के लिए जी जान से प्रयत्न करने वालो में वीर सावरकर का स्थान बहुत ऊचा है। ------वे केवल हिन्दी देशभक्त hee नही,वरन समस्त विश्व के प्रेरणा श्रोत हैं। में तो मानव समाज के दर्शनकार के रूप में उन्हें देखता हूँ। भारतीय जनता का यह आध्य कर्तव्य है कि सम्पूर्ण स्वतंत्रता के जनक के रूप में उनका सत्कार करे."---ये शब्द इंग्लेंड के सुप्रसिद्ध विद्वान् व पत्रकार श्री गाय अल्द्रेड के हैं, जो सावरकर के समय में हेराल्ड,फ्री वूमेन एवं जस्टिस आदि पत्रों के सम्पादक, प्रकाशक व प्रतिनिधि थे.(गाय अल्द्रेड)
      २५ जून सन १९४४ को सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार की स्थापना पर नेताजी सुभाष चंद्र बोश ने सिंगापुर रेडियो पर अपने संदेश में कहा कि,-------"जब भ्रमित राजनैतिक विचारों और अदूरदर्शिता के कारन कांग्रेस के लगभग सभी नेता अंग्रेजी सेना में भारतीय सिपाहियों को भाड़े का टट्टू कहकर बदनाम कर रहे थे,उस समय सबसे पहले वीर सावरकर ने निर्भीकता से भारतीय युवको को सेना में भरती होने का आह्वान किया.सावरकरजी कि प्रेरणा पर सेना में भरती युवक ही हमारी आई ० एन ० ऐ ० के सिपाही बने हैं.उन्होंने इस बात का भी रहस्योद्घाटन किया कि,आइ० एन० ए० को संघटित करने कि प्रेरणा भी उन्हें सावरकर जी से ही मिली थी। उन्होंने बताया कि,जब वे सावरकर जी से मिलने मुंबई गए तब सावरकर जी ने उन्हें यह राय दी थी कि अंग्रेजों कि जेल में सड़कर मरने कि बजाय यह अच्छा होगा कि वे देश से बाहर चले जायं और आई ० एन० ए० को संगठित करें। (नेता जी सुभाष चंद्र बोश)
      सरदार भगत सिंह ने रत्ना गिरी में जाकर सावरकर जी से आशीर्वाद लिया था.तथा सावरकर जी के लिखे ग्रन्थ को प्रकाशित कराया था।
      ऐसे क्रांतिकारियों के प्रेरणा श्रोत,महान दार्शनिक, हिंदुत्व विचारक, करोड़ो भारतियों के ह्रदय सम्राट वीर सावरकर की जयंती (28 may)पर कोटि-कोटि नमन .

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