Saturday, January 30, 2010

श्रीनगर: हिंदू-मुस्लिम ने दी एकता की मिसाल

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    ज्वाइंट कमेटी भी बनाई गई है जो इलाके के करीब 550 मंदिरों को धीरे धीरे खुलवाएगी।
    • श्रीनगर के डाउन टाउन में आजकल लगी भीड़ एक खास मकसद से जुटी रही है। दरअसल ये जमीन एक मंदिर की है जहां राज भैरव का कुंड हुआ करता था। सदियों से यहां पूजा होती आ रही थी लेकिन पिछले करीब 20 सालों से यहां लैंड माफिया का कब्जा था। अब हिम्मत जुटा कर स्थानीय लोगों ने लैंड माफिया से मुकाबला कर उन्हें यहां से निकाल दिया। खास बात ये है कि इसके लिए उन्हें मदद मिल रही है स्थानीय मुस्लिमों की।

       

      कश्मीर में कई ऐसे मंदिर हैं जो काफी समय से बंद पड़े हैं। इन्हें खोलने के लिए स्थानीय लोग पूरी जद्दोजहद में लगे हैं। हिंदू-मुस्लिम सभी लोग यहां मिल जुलकर इस काम को बढ़ावा देने में जुटे हैं। इसके लिए अब जगह जगह ज्वाइंट कमेटी भी बनाई गई है जो इलाके के करीब 550 मंदिरों को धीरे धीरे खुलवाएगी। ये कमेटियां धीरे धीरे हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल भी बनती जा रही हैं

    • ज्वाइंट कमेटी भी बनाई गई है जो इलाके के करीब 550 मंदिरों को धीरे धीरे खुलवाएगी।

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त्रिनिदाद में मोबाइल मंदिर :: सहारा समय

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    • पोर्ट-ऑफ-स्पेन
    • त्रिनिदाद एंड टोबैगो में हिंदुओं ने एक धार्मिक आयोजन के लिए एक विशेष मोबाइल मंदिर की स्थापना की है, जिसमें हनुमान की सात फुट लंबी प्रतिमा स्थापित है।
      चलता-फिरता हनुमान मंदिर यहां के विभिन्न शहरों का भ्रमण कर रहा है। इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत गुरुवार को हुई थी जो अगले सात दिनों जारी रहेगा।
      उल्लेखनीय है कि त्रिनिदाद की कुल आबादी का 44 फीसदी भारतीय मूल के लोग हैं, जिनमें अधिकांश हिंदू हैं। यहां लगभग 147,000 भारतीय 1845 और 1917 के मध्य उत्तर प्रदेश और बिहार से आए थे।
      धार्मिक आयोजन की व्यवस्था हिंदू उत्सव समाज ने की है।

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Jagran - Yahoo! India - गोडसे की चौथी कोशिश में हुई गांधीजी की हत्या

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    • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के लिए प्रयास केवल 30 जनवरी 1948 को ही नहीं हुआ था बल्कि उससे पहले छह बार उन्हें मारने की कोशिश हुई थी। पांच बार के प्रयासों की जानकारी तो दस्तावेजों में दर्ज है लेकिन बिहार में हुए छठी कोशिश के बारे में कम लोग ही जानते हैं। यह प्रयास तब प्रकाश में आया है जब गांधीजी को बचाने वाले बत्तक मियां का परिवार मुश्किलों में घिरा है और बिहार सरकार उसे बचाने के लिए आगे आई है।
    • हत्या के छह प्रयासों में से पांच इन्हीं स्वदेशियों द्वारा रचित थे, जबकि एक का षडयंत्र अंग्रेजों का था। पांच प्रचलित षडयंत्रों में से तीन में नाथूराम गोडसे शामिल था। हिन्दू महासभा के कार्यकर्ता के रूप में गोडसे का गांधी विरोध काफी दिनों से था। उसने मई सन् 1944 में गांधी के समक्ष पहला उग्र प्रदर्शन किया था। तब गांधीजी पंचगनी के दिलकुश बंगले में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे। उस समय नाथूराम गोडसे ने दो दर्जन युवकों के साथ वहां पहुंचकर पहले पूरे दिन विरोध प्रदर्शन किया, शाम को प्रार्थना सभा के मौके पर नारे लगाते हुए गांधीजी के पास पहुंचने की कोशिश की। वहां मौजूद लोगों द्वारा पकड़ लिए जाने से गोडसे की यह कोशिश सफल नहीं हो सकी। गोडसे का दूसरा प्रयास गांधीजी और जिन्ना की वार्ता के विरोध में था। सितंबर 1944 में जिन्ना से वार्ता के लिए मुंबई जा रहे गांधीजी को रोकने के लिए हिन्दू महासभा के कार्यकर्ता सेवाग्राम आश्रम पहुंचे थे, वहां पर उनकी कोशिश सफल नहीं हुई। इसी दौरान नारेबाजी करते गोडसे को आश्रम के लोगों ने पकड़ लिया, तब उसके पास एक बड़ा चाकू बरामद किया गया था। तीसरा प्रयास गांधीजी की हत्या से मात्र दस दिन पहले किया गया था। 20 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिरला भवन में बम विस्फोट करके पहले अफरा-तफरी पैदा करने और उसके बाद गांधीजी को गोली मारने की योजना अंतिम क्षणों में रद दी गई। उस षडयंत्र में गोडसे सहित सात लोग शामिल थे।

      25 जून 1934 को सबसे पहले पुणे में गांधीजी के कार काफिले पर तब बम फेंका गया, जब वह एक बैठक को संबोधित करने जा रहे थे। इसके अतिरिक्त 29 जून 1946 को गांधी स्पेशल ट्रेन को दुर्घटनाग्रस्त करके गांधीजी की हत्या का प्रयास किया गया। अल्पज्ञात ताजा प्रकरण बिहार के चंपारण का है। तब चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी को नीलहे कोठी के अंग्रेज प्रबंधक ने दूध में जहर देकर मारने की कोशिश की थी। अंग्रेज अधिकारी के यहां रसोईए का काम करने वाले बत्तक मियां ने इस बारे में राष्ट्रपिता को इस बारे में सावधान कर दिया था। जबकि दूध में जहर मिलाने की जिम्मेदारी बत्तक मियां को ही सौंपी गई थी। मियां का निधन सन् 1957 में हो गया। अब उनके परिवारीजन बिहार में रहते हैं।


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लाखों लोगों ने लगाई गंगा में डुबकी

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    • दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले में से एक कुंभ मेला में माघ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर शनिवार को लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। थरथराती ठंड और घने कोहरे के बीच लाखों लोगों में पुरुष, महिला, बच्चे और साधू-संतों ने गंगा में स्नान किया। हिंदू मान्यता के अनुसार आज के दिन गंगा में स्नान करने से सारी बाधाएं खत्म हो जाती हैं और मनुष्य को मुक्ति मिल जाती है।

    • हरिद्वार

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रामलला के दर्शन को सुप्रीम कोर्ट की शरण :: प्रेसनोट डाट इन | आपकी भाषा आपकी खबरें

रामलला के दर्शन को सुप्रीम कोर्ट की शरण
    • जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीमकोर्ट में अर्जी दाखिल कर अयोध्या में रामलला के विधिवत पूजन-दर्शन की अनुमति मांगी है।
      सुब्रमण्यम ने कोर्ट से रामभक्तों को पूजा-अर्चना की कुछ और सुविधाएं दिये जाने और गैर जरूरी बाधाएं समाप्त किये जाने का अनुरोध किया। सुप्रीमकोर्ट ने भी स्वा� �ी को मामले में पक्षकार बनने की अनुमति देते हुए अन्य पक्षकारों से जवाब मांगा है।
      स्वामी की इस अर्जी से चौदह साल बाद रामलला की पूजा अर्चना का मामला फिर उठ खड़ा हुआ है।
    • दो फिट चौड़ी बैरीकेडिंग में भक्तों को करीब चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इस बीच कोई परेशान होकर वापस लौटना चाहे तो नहीं लौट सकता। इसके अलावा वहां भक्तों के लिए किसी तरह की सुविधा भी नहीं है। कोर्ट को इन परेशानियों पर विचार करना चाहिए। यह था हाईकोर्ट का आदेश हाईकोर्ट ने फरवरी 2006 में आदेश पारित कर हिन्दू भक्तों को दर्शन और पूजा में कुछ और छूट दिये जाने की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट ने माना था कि भक्तों को दर्शन के अलावा अर्चना का भी अधिकार है।
      हाईकोर्ट ने 15 फीट की दूरी के बजाय इसकी आधी दूरी से दर्शन कराये जाने और पुजारी को पूजन सामग्री रामलला के चरणों में चढ़ाने की अनुमति भी दी थी। पूजा व प्रसाद सामग्री के स्टाल लगाने व पार्किंग तथा सामान रखने के लिए क्लॉक रूम की व्यवस्था करने का भी आदेश था। यहां तक कि हाईकोर्ट ने पार्किंग के पास जनसुविधाएं भी मुहैया कराने को कहा था। लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने 10 मई 1996 को हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाते हुए यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिये थे।

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