Friday, September 4, 2009

मझधार में भाजपा

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    • भाजपा पर आरएसएस की पकड़ उसे अपना आधार बढ़ाने में मददगार नहीं होगी। भाजपा की लोकसभा में सीटें लगातार घट रही हैं। दक्षिणी और पूर्वी राज्यों में वह जड़ें नहीं जमा पा रही हैं। अपने गढ़ों में भी वह और मजबूत नहीं हो पा रही है। भाजपा को यदि आगे बढ़ना है तो उसे राजनीतिक पार्टी के रू प में ऎसी गतिविधियां चलानी होंगी, जिनसे युवा मतदाता उसकी ओर आकृष्ट हों। यदि वह वैचारिक और संगठनात्मक दृष्टि से आरएसएस पर ही निर्भर रही तो यह काम कठिन हो सकता है। यही बड़ा संकट है, जिससे भाजपा जूझ रही है। यदि नेतृत्व का विवाद सुलट भी गया तो भी यह संकट तो खत्म होना मुश्किल लगता है। लगातार दो पराजयों से यह साफ हो गया है कि "हिन्दू वोट" जैसा कुछ भी नहीं है। यह तो स्थाई वोट बैंक जैसा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मिथिक ही है।
    • हरिहर स्वरू प
      [लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं]

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