Sunday, January 17, 2010

महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar): सुप्रीम कोर्ट : हुबली का ईदगाह मैदान सार्वजनिक उपयोग के लिये – उमा भारती की नैतिक जीत… Hubli Idgah Land Issue, Supreme Court, Anjuman-BJP

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    • हुबली के ईदगाह के मैदान का भूमि विवाद सन् 1921 से चल रहा है, जब हुबली नगरपालिका ने स्थानीय अंजुमन-ए-इस्लाम को इस मैदान का 1.5 एकड़ हिस्सा नमाज के लिये कुछ शर्तों पर दिया था। शुरु से ही शर्तों का उल्लंघन होता रहा, प्रशासन, सरकारें आँखें मूंदे बैठे रहे। जब हिन्दूवादी संगठनों ने इस पर आपत्ति उठाना शुरु किया तब हलचल मची, इस बीच 1990 में अंजुमन ने इस भूमि पर पक्का निर्माण कार्य लिया, जिसने आग में घी डालने का काम कर दिया, और जब सरकार ने इस निर्माण कार्य को अतिक्रमण कहकर तोड़ने की कोशिश की तब मामला न्यायालय में चला गया, फ़िर जैसा कि होता आया है हमारे देश के न्यायालय न्याय कम देते हैं “स्टे ऑर्डर” अधिक देते हैं, मामला टलता गया, गरमाता गया, साम्प्रदायिक रूप लेता गया। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती ने इस मैदान पर जब तिरंगा फ़हराने की कोशिश की थी, तब “स्वार्थी तत्वों” दंगे भड़काये गये थे और पुलिस गोलीबारी मे 9 लोग मारे गये थे, उमा भारती के खिलाफ़ स्थानीय न्यायालय ने गैर-ज़मानती वारंट जारी किया था और उन्हें संवैधानिक बाध्यताओं के चलते अपना मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था।
    • अब देखना यह है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद उस जगह से अंजुमन का अतिक्रमण हटाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं (क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों को लतियाने की परम्परा रही है इस देश में)। वैसे तो यह पूरी तरह से एक भूमि विवाद था जिसे अतिक्रमणकर्ताओं ने “साम्प्रदायिक” रूप दे दिया, लेकिन फ़िर भी उमा भारती के लिये व्यक्तिगत रूप से यह एक नैतिक विजय कही जा सकती है।

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