Wednesday, September 16, 2009

अब सिंघल की किताब पर भाजपा की नींद उडी

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    • आडवाणी व जसवन्त की किताब के बाद अब विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की जल्द आने वाली किताब से भाजपा में बवाल मचने की आशंका है। इस किताब के जरिए सिंघल राममंदिर निर्माण से जुडी ऎसी सच्चाई सामने ला रहे हैं जो भाजपा के भीतर फिर भू-चाल ला सकती है।


      प्रकाशन की तिथि तय नहीं
      मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में सिंघल ने कहा कि राममंदिर क्यों नहीं बना, इसकी सच्चाई उन्हें पता है और इसका खुलासा उनकी किताब करेगी। पुस्तक में उन भाजपा नेताओं का भी जिक्र होगा जो राजग सरकार के दौरान मंत्री थे लेकिन जिनकी दिलचस्पी राम मंदिर में बिल्कुल नहीं थी। हालांकि सिंघल ने पुस्तक के बाजार में आने की कोई मियाद नहीं बताई।

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    • गंगा के अविरल प्रवाह के लिए आंदोलन कर रहे गंगा रक्षा मंच के सह संयोजक स्वामी परमात्मानंद सरस्वती के साथ यहां आए सिंहल ने देश में नदियों को जोड़ने का खुल कर विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार को नदियों को मिलाने से पहले इससे जुड़े इंजीनियरों से बात करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसी बड़ी परियोजनाएं सिर्फ पैसा खाने के लिए बनाई जाती हैं।
    • राहुल ने हाल ही में चेन्नई में कहा था कि नदियों को जोड़ने की परियोजना ठीक नहीं है। सिंहल ने कहा कि राहुल से पहले राजीव गांधी भी ऐसी ही बात कहते थे। उन्होंने गंगा एक्शन प्लान बनाया था। सिंहल ने यह तक कह दिया कि वैसे तो राहुल को अभी अपने देश का भी पता नहीं है, फिर भी अगर वह काम करना चाहते हैं तो हम साथ हैं।

जानकी संग फिर सात फेरे लेंगे रामलला - Jagran - Yahoo! India - Dharm Marg

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    • नवम्बर में त्रेतायुग फिर अवतरित होगा, जब दूल्हे की तरह सज-धजकर रामलला जानकी को ब्याहने के लिए बारात लेकर जनकपुर [नेपाल] रवाना होंगे। वहां जानकी मन्दिर में 21नवम्बर को वैदिक रीति से राम और वैदेही का ब्याह होगा। बारात 24नवम्बर को दूल्हा-दुल्हन के साथ अयोध्या वापस लौटेगी।

      जी हां, अयोध्या में भगवान राम के ब्याह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। सन्त-धर्माचार्य बाराती बनकर इस पवित्र अनुष्ठान का हिस्सा बनने को लालायित हैं। विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा बताते हैं कि अयोध्या के सन्तों द्वारा राम बारात लेकर जनकपुर जाने की परंपरा पुरानी है, यद्यपि वक्त के साथ इसके अन्तराल जरूर बढते गए। अरसे बाद 2004में राम बारात का आयोजन हुआ था, जिसका यूपीव बिहार के अलावा नेपाल में भी बडी गर्मजोशी से स्वागत किया गया था। तब खुद महाराजा ज्ञानेन्द्र ने बारात का स्वागत किया था।

    • बारात आजमगढ व बक्सर के रास्ते बिहार में दाखिल होगी, और फिर 20नवम्बर को दूधमतीपहुंचेगी। अगले दिन वहां जानकी मन्दिर में सीता-राम का विवाह होगा। सूत्र बताते हैं कि नेपाल में पिछले कुछ समय से भारतीय मूल के हिन्दुओं के साथ हो रहे अभद्र बर्ताव के मद्देनजर राम बारात का खासा महत्व है, यद्यपि इसी बहाने यूपीऔर बिहार के यात्रा मार्ग में भी हिन्दुओं को संगठित करने पर भी नजर है।

लौटाएंगे हिन्दुओं की सम्पत्ति!

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    • बांग्लादेश की सरकार ने कहा है कि वह उस कानून को बदलना चाहती है, जिसके तहत 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हिन्दू अल्पसंख्यकों की सम्पत्ति को बड़े पैमाने पर जब्त कर लिया गया था।
    • वेस्टिड प्रॉपर्टी एक्ट के तहत सरकार उस भूमि और उन इमारतों को अपने कब्जे में ले सकती थी, जिनके मालिक पूर्वी पाकिस्तान से पलायन करने वाले हिन्दू थे। हिन्दू कहते हैं कि वे महसूस करते हैं कि इस कानून के कारण वे अपने ही देश में दूसरे दर्जे के नागरिक हो गए। यह कानून तब पारित हुआ था, जब वर्ष 1965 के युद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान में हिन्दुओं के खिलाफ दंगे हुए थे और लाखों हिन्दू देश छोड़कर भारत में भाग गए थे।

आपके सवाल------ हर साल ये देवता सोने क्यूँ चले जाते हैं? (देवशयन) - ज्योतिष की सार्थकता

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    • देवता वर्षाकाल में अधोलोक,शीतकाल में मध्यलोक तथा ग्रीष्मकाल में उधर्वलोक को चले जाते हैं---इसका तात्पर्य ये है कि वर्षा ऋतु में शरीर का समस्त तेज पैरों में, शीत ऋतु में पेट में और ग्रीष्म ऋतु में सिर पर होता है। प्रमाणस्वरूप वर्षाकाल में पैरों में सर्दी का अनुभव नहीं होता, शीतकाल में भूख अधिक लगती है और ग्रीष्मकाल में सिर पर शीघ्र गर्मी चढ जाती है।
    • देवोत्थान(देवताओं के जाग उठने) का अर्थ ये है कि जब जठराग्नि जाग उठी तो उसका तेज(उष्मा) पैरों से चलकर पेट में आ गया।
    • तो चाहे विश्व का कोई भी धर्म हो उसके मूल में सिर्फ इन्सान का भय और श्रद्धा ही काम करती है लेकिन यदि आप गहराई से सनातन धर्म का अध्ययन करें तो पाएंगे कि हिन्दू धर्म विश्व का एकमात्र वैज्ञानिक धर्म है,जिसका प्रत्येक नियम,परम्परा अपने भीतर विज्ञान समेटे हुए है।