Saturday, February 6, 2010

Jagran - Yahoo! India - National :: हिंदू लड़किया न हों बेपरदा

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    • पाकिस्तान में तालिबान का नया फरमान यह है कि हिंदू परिवार की बेटिया भी बाजार जाते समय परदे में रहें, यानि कि बुर्का पहन कर ही उन्हें बाजार जाना होगा।
    • अटारी [रमेश शुक्ला सफर]
    • 21 साल की प्रियंका 28 दिन बाद भारत से पाकिस्तान लौटते समय गमगीन थी। वह चुप थी। आखों में दहशत और जुबा पर दर्द था। वह सहमी थी। अंतरराष्ट्रीय अटारी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर बैठी प्रियंका भले ही समझौता एक्सप्रेस का इंतजार था, लेकिन वह भारत में और समय गुजारना चाहती थी।
    • उसने मैट्रिक तक गाव में ही पढ़ाई की। उसके बाद जब कालेज में नाम लिखाने के लिए अपने पिता राजकुमार व भाई दिलीप कुमार के साथ गई तो कालेज वालों ने इस लिए नाम लिखने से मना कर दिया क्योंकि वह हिंदू परिवार की बेटी थी।

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Jagran - Yahoo! India - डा.अंबेडकर का विमर्श



    • यह भ्रम बना हुआ है कि डा. भीमराव अंबेडकर केवल दलित नेता थे। वह सदैव पूरे देश के लिए सोचते और काम करते रहे। निस्संदेह, आज बहुत से लोग अंबेडकर और दलितवाद के नाम पर ऐसी गतिविधियों में संलग्न हैं, जिससे अंबेडकर को घृणा होती। अंबेडकर ने बार-बार घोषित किया था कि भारतीय समाज की सबसे निम्न सीढ़ी के लोगों के लिए आर्थिक उत्थान से बड़ा प्रश्न उनके आत्मसम्मान, विवेक और आत्मनिर्भरता का है। आजकल अंबेडकर का नाम लेकर जब-तब 'बौद्ध दीक्षा समारोह' आयोजित होते हैं। इन आयोजनों में ईसाई मिशनरियों का बड़ा हाथ होता है। किंतु दलितों को बौद्ध धर्म में मतांतरित कराने में ईसाई नेताओं की क्या दिलचस्पी है? इसका जवाब 'क्राइस्ट व‌र्ल्ड' पत्रिका में है। इसमें लिखा है कि दलितों की मुक्ति के लिए ईसाई समाज ने इतना काम किया है कि दोनों के बीच एक संबंध विकसित हो गया है। इससे भविष्य में दलितों का ईसाई पंथ में मतांतरित हो जाना एक स्वभाविक संभावना है।
      मिशनरी संस्था 'गोस्पेल फार एशिया' के अनुसार पहले दलितों को केवल बौद्ध होने के लिए कहा गया। बदले में दलित नेताओं ने वादा किया कि वे अपने लोगों को ईसाई बनाने के लिए हमारे साथ काम करेंगे। इनमें यदि एक तिहाई भी बाद में ईसाई बन जाते हैं तो कितनी बड़ी संख्या में नए ईसाई होंगे! क्या इसीलिए डा. अंबेडकर बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए थे? उन्होंने स्पष्ट कहा था कि अपने कार्य के लिए उन्हें विदेशी धन की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत को बाहरी मजहबों की कोई आवश्यकता नहीं है।

    • [एस शंकर: लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं]

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पुण्य के साथ शुभ कार्य से ही मिलेंगे परमात्मा

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    • पं. विजयशंकर मेहता
    • जीते-जी पुनर्जन्म हो जाए तो जैन धर्म के महावीर स्वामी के अनुसार साधुता घट जाएगी और हिंदू धर्म के शंकराचार्य के मुताबिक ब्राह्मणत्व उतर जाएगा। हिंदुओं ने इसी को द्विज कहा है और जैनियों ने मुनि माना है। महावीर स्वामी का एक सूत्र है- जो पुण्य की इच्छा करता है, वह संसार की ही इच्छा करता है।



      पुण्य सुगति हेतु आवश्यक है, पर निर्वाण तो पुण्य के क्षय से ही होता है। इसमें निर्वाण शब्द का अर्थ है जीवन का समापन और पुनर्जन्म की संभावना का समाप्त होना, लेकिन निर्वाण अपने आप में द्विज तथा मुनि होने की यात्रा है। उसके बिना परमात्मा तक नहीं पहुंच सकते। केवल पुण्य करने से परमात्मा नहीं मिलेगा। शुभ कार्य किए जाएं किंतु उसमें त्याग की भावना हो। पुण्य अर्जित करने के लिए दान का बड़ा महत्व है। अपरिग्रह वृत्ति के अभाव में किया गया दान अभिमान बढ़ाता है।

    • जीते-जी पुनर्जन्म हो जाए तो जैन धर्म के महावीर स्वामी के अनुसार साधुता घट जाएगी और हिंदू धर्म के शंकराचार्य के मुताबिक ब्राह्मणत्व उतर जाएगा। हिंदुओं ने इसी को द्विज कहा है और जैनियों ने मुनि माना है। महावीर स्वामी का एक सूत्र है- जो पुण्य की इच्छा करता है, वह संसार की ही इच्छा करता है।



      पुण्य सुगति हेतु आवश्यक है, पर निर्वाण तो पुण्य के क्षय से ही होता है। इसमें निर्वाण शब्द का अर्थ है जीवन का समापन और पुनर्जन्म की संभावना का समाप्त होना, लेकिन निर्वाण अपने आप में द्विज तथा मुनि होने की यात्रा है। उसके बिना परमात्मा तक नहीं पहुंच सकते। केवल पुण्य करने से परमात्मा नहीं मिलेगा। शुभ कार्य किए जाएं किंतु उसमें त्याग की भावना हो। पुण्य अर्जित करने के लिए दान का बड़ा महत्व है। अपरिग्रह वृत्ति के अभाव में किया गया दान अभिमान बढ़ाता है।



      दान में त्याग की भावना उसे शुद्धता की ओर ले जाएगी। महावीर स्वामी ने कहा है शुभ-अशुभ का त्याग कर दो, तब शुद्ध की ओर यात्रा होगी। इसकी फिक्र न की जाए कि हमसे कितना शुभ हुआ है कितना अशुभ। चिंता इस बात की की जाए कि शुद्ध की ओर कैसे बढ़ें। इस शुद्ध में ही परमसत्ता विराजित है। हिंदुओं ने इसे ही ब्राह्मणत्व से जोड़ा है। ब्राह्मण यानी शुद्ध होना। यह भी कहा गया है कि जन्म से सभी शुद्र होते हैं। आगे जाकर कमरानुसार कुछ ब्राह्मणत्व को प्राप्त हो जाते हैं। इसीलिए जन्म होने के बाद भी जन्म लेना पड़ता है। इस पुनर्जन्म को द्विज कहा गया है। इसलिए हमारी तैयारी शुद्धता की होनी चाहिए तन, मन और धन से।


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बांग्लादेश में मंदिर में तोड़-फोड़

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    • बांग्लादेश की राजधानी ढाका के समीप एक प्राचीन हिंदू मंदिर पर कुछ शरारती लोगों ने हमला कर छह मूर्तियों को खंडित कर दिया।

      वेबसाइट 'बीडीन्यूज 24' के अनुसार शनिवार को नारानगंज जिले के अशराफदी गांव में स्थित श्री श्री रक्षाकाली मंदिर में शुक्रवार रात 30-35 लोगों ने हमला कर दिया था।

      वेबसाइट ने पुलिस के हवाले से बताया कि हमलावरों ने मंदिर से सटे चार मकानों में भी तोड़फोड़ की, जिसमें पांच लोग घायल हो गए।

      स्थानीय पुलिस अधिकारी मोहम्मद युनूस अली ने कहा कि तोड़फोड़ की घटना गांव में अलग-अलग धर्मो के युवकों के बीच हुए विवाद का नतीजा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है।

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SRK पाक का वकील, नहीं चलने देंगे उसकी फिल्में: VHP

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    • धीरज राय.
    • भोपाल.
    • विहिप के वरिष्ठ नेता और अंतरराष्ट्रीय महासचिव प्रवीण तोगड़िया ने शिवसेना के नरम रुख के बाद शाहरुख पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान को शाहरुख के रुप में एक वकील मिल गया है।

      उन्होंने यह भी कहा कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल मिलकर शाहरुख की फिल्मों का विरोध करेंगे। मुंबई सभी देशवासियों की है। हालांकि शिवसेना के बारे में कुछ कहने से वे कन्नी काट गए।
    shahrukh

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