Saturday, February 27, 2010

विवादों में घिरे डा. साबर

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    • अमृतसर. सिख धर्म अध्ययन कोर्स के डायरैक्टर डा. जसबीर सिंह साबर विवादों में घिर गए हैं। अलग रविदास ग्रंथ तैयार करने के चलते पहले ही चर्चा में आए डा. साबर पर अब सिख धर्म अध्ययन कोर्स के दूसरे पाठयक्रम में हिंदु ग्रंथों को तवज्जो देने के आरोपों लगे हैं।



      अकालतख्त के जत्थेदार गुरबचन सिंह ने कहा है कि अगर उनके खिलाफ अकालतख्त को लिखित शिकायत मिलता है तो विचार कर सकते हैं। गौर हो कि मौजूदा विवाद के तहत डा. साबर पर सिख इतिहास में हुई कुर्बानियों को दरकिनार कर हिन्दु धर्म के इतिहास, धार्मिक ग्रंथों व हिंदू धर्म का विशेष उल्लेख करने का आरोप है।



      याद रहे कि डेरा बल्लां की ओर से जारी वैबसाइट टैक्सट ऑफ अमृतबाणी में गुरु रविदास संबंधी उपलब्ध जानकारियों के तहत उनकी ओर से महत्वपूर्ण जानकारी मुहैया कराने व अलग ग्रंथ तैयार करने के प्रति उनका नाम दर्ज है। हालांकि उनका मानना है कि केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज रविदास की बाणी ही प्रमाणित है।


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गले मिलें, करें ठिठोली और खेलें तिलक होली

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    • भोपाल. शहर में सोमवार को होली पर्व हषरेल्लास से मनेगा। लोग हंसी-ठिठोली के बीच गूजे और पकवानों का भरपूर आनंद लेंगे पर पानी को व्यर्थ नहीं बहने देंगे। शहर की अनेक संस्थाओं ने लोगों से अपील की है कि वे पानी की किल्लत को ध्यान में रखकर गुलाल, रोली और चंदन आदि का तिलक लगाकर होली मनाएं।



      बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी विकास समिति के सदस्यों ने लकड़ी की जगह कंडों से होली जलाने व सूखे रंगों से होली खेलने का संकल्प लिया। अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी ने बताया कि पर्यावरण व जल की रक्षा को ध्यान में रख सभी सदस्यों ने यह निर्णय लिया है।


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पंजाब-हरियाण में डेरा सच्चा सौदा समर्थकों का तांडव

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    पंजाब और हरियाणा के तमाम शहरों में बाबा के समर्थक बवाल कर रहे हैं।
    • पंजाब और हरियाणा के तमाम शहरों में बाबा के समर्थक बवाल कर रहे हैं। बाबा राम रहीम के समर्थक उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के खिलाफ हिंसा पर उतर आए हैं। दरअसल दो दिन पहले सीबीआई ने बाबा राम रहीम के खिलाफ कत्म के एक मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इससे डेरा समर्थक भड़के हुए हैं।

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होली पर सिनावल में नहीं बिखरते रंग

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    • गणेशदत्त सांवला
    • जी हां! दतिया अनुभाग के ग्राम सिनावल, जिसे स्थानीय लोग सोनागिर के नाम भी जानते हैं, में उल्लास व उमंग के पर्व होली पर रंग नहीं बिखेरे जाते। इसकी वजह न तो कोई मान्यता या किवदंती है और न ही प्राकृतिक आपदा का अंदेशा। ग्रामीण बताते हैं कि सांप्रदायिक सोहाद्र्र को ध्यान में रखते हुए पूर्वजों ने कभी होली न खेलने का निर्णय लिया होगा। जिस पर आज तक अमल जारी है।
    • इसी उपलक्ष्य में यहां वर्षों से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से पांच दिवसीय मेले का आयोजन होता है। इस मेले में देश के कोने-कोने से जैन समाज के लोग पहुंचते हैं। ग्राम पंचायत सिनावल के सरपंच संतोष चौधरी के अनुसार बाहर से आने वाले जैन धर्मावलंबियों को होली के रंगों से परेशानी न हो और उनकी आध्यात्मिक यात्रा में किसी भी प्रकार का व्यवधान पैदा न हो, इसी सोच के साथ कभी ग्राम सिनावल के ग्रामीणों ने होलिका दहन के बाद क्षेत्र में होली न खेलने का निर्णय लिया होगा। इसी निर्णय के चलते ग्राम सिनावल के ग्रामीण होली नहीं खेलते और न ही अन्य किसी पर रंग डालने का प्रयास करते है। इस तरह लोगों ने आज भी वर्षों की परंपरा को कायम रखा है।

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visfot.com । विस्फोट.कॉम - 15 हजार मछुआरे क्या मराठी माणुस नहीं हैं?

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    • राजेश सिंह, रत्नागिरी से लौटकर
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    • इन मछुआरों के रोजगार को तहस-नहस करने के पीछे एक कंपनी है जो कि 20 वर्ष पहले यहाँ आयी है। कंपनी का नाम है फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड। स्थानीय लोग एवं कंपनी से पीड़ित मछुआरे बताते है कि इस कंपनी और कंपनी के मालिक को मराठा क्षत्रप शरद पवार का आशीर्वाद प्राप्त है इसलिए इन मछुआरों की व्यथा को स्थानीय समाचार पत्रों में भी जगह नहीं मिलती।
    • स्थानीय जानकार कंपनी के इन करतूतों को पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बता रहे है इनके अनुसार रनपार बंदर का 8 किलोमीटर का समुद्री किनारा है और रनपार बंदर के तीन तरफ से पहाड़ है इस 8 किलोमीटर लंबे समुद्री किनारे पर समुद्री घास मैन्ग्रोस की बहुतायत है समुद्री मछलियां इन्ही समुद्री मैन्ग्रोस के पास अंडे देने आती है रनपार बंदर का समुद्री किनारा मछलियों के अंडे देने का सबसे पसंदीदा जगह था किन्तु अब कंपनी के  मालवाहक जहाज और बार्जों के आवाजाही से रनपार बंदर के समुद्री किनारे का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है अब जब संयुक्त राष्ट्र नें वर्ष 2010 को बायोडाईवर्सिटी इयर यानि जैव विविधता वर्ष घोषित किया है कंपनी ( फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड) रनपार बंदर के जैव विविधता को ध्वस्त करने पर तुली है. चूँकि यह कंपनी मछुआरों के रोजगार को छीन रही है इसलिए मछुआरे कंपनी के विरुद्ध आवाज उठा रहे है. मछली व्यवसाय के इस धंधे के कुल 15,000  आश्रितों के आजीविका को छीनने वाली इस कंपनी में केवल 300 लोग रोजगार पाते है जिसमे 26 लोग स्थानीय यानि मराठी माणुस हैं. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे, मनसे प्रमुख राज ठाकरे और मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण यह बताने की कोशिश करेंगे कि 15000 मछुआरे मराठी माणुस क्यों नहीं है?

      (राजेश सिंह मानवाधिकार संगठन AIHRCO के अध्यक्ष हैं और नागरिक विकल्प नामक पत्रिका के संपादक हैं. संपर्क: nagrikvikalp@gmail.com)


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