Wednesday, September 23, 2009

गुजरात में नहीं है विसर्जन की परम्परा

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    • उदयपुर
    • मेलड़ी माता मन्दिर में अहम मंथन होने के बाद अब शहर में गरबा समितियों को अपील पत्र देकर उनसे आग्रह किया जाएगा कि वे देवी प्रतिमा का झीलों में विसर्जन नहीं करें।
    • सभी गरबा मण्डल इस बार नवरात्रि पश्चात माताजी की प्रतिमाओं को जल में विसर्जन नहीं करें अपितु उन प्रतिमाओं को सवीना बाईपास पर स्थित मेलड़ी माता मंदिर परिसर में गाजे बाजे के साथ लावें एवं वहां पर प्रतिमाओं को विराजमान कर देवें ताकि उनकी पूजा अर्चना, धूप, ध्यान निरन्तर हो सके और अगले वर्ष आप फिर उस प्रतिमाओं को वापस ले लेवें।
      अपील पत्र में यह भी जिक्र किया गया है कि सर्वविदित है कि गरबा का चलन गुजरात से प्रारम्भ हुआ है और गुजरात में कहीं पर भी माताजी की प्रतिमा का जल विसर्जन नहीं किया जाता है। अपितु ९ दिवस पश्चात उसे विधि विधान से पुन: किसी मंदिर अथवा धार्मिक स्थल पर रख दी जाती है।

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