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- पर्यावरण मंत्रालय के पास इतनी ताकत नहीं है कि वह अन्य मंत्रालयों एवं सरकारी प्रतिष्ठानों की नकेल कस पाए। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि गंगा से जुड़े मुद्दों को सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय के जिम्मे किया जाए। तभी कुछ उम्मीद की जा सकती है।
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नए पर्यावरण मंत्री के बयान से भी सरकार की नीयत को लेकर शंका उत्पन्न होती है। श्री जयराम रमेश ने पर्यावरण व वन मंत्री का पद संभालने के बाद अपने बयान में कहा कि विचाराधीन परियोजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति देने के मार्ग में आ रहे अवरोधो को दूर करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।
श्री जयराम रमेश ने यह भी कहा कि पर्यावरण मंत्रालय ‘मार्केट फ्रेंडली’ रहेगा। मंत्री जी का यह बयान अत्यंत आपत्तिजनक है। पर्यावरण मंत्री के नाते उनका जोर ‘पीपुल फ्रेंडली और एको फ्रेंडली’ होने पर रहना चाहिए। ऐसा लगता है कि वे बड़े थैलीशाहों और औद्योगिक घरानों की राह आसान करने के लिए ही मंत्री बने हैं। ऐसे में उनसे गंगा के उद्धार के लिए गंभीर प्रयास करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
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Thursday, October 29, 2009
Ganga River Basin Authority | राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन | RASHTRIYA SWABHIMAN ANDOLAN
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Ganga River Basin Authority | राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन | RASHTRIYA SWABHIMAN ANDOLAN
2009-10-29T12:44:00+05:30
Common Hindu