Sunday, June 20, 2010

visfot.com । विस्फोट.कॉम - इस अलगाव की कीमत जानते हैं नीतीश !

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    • पुष्यमित्र
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      जैसा कि हम सभी जानते हैं नीतीश का गणित साफ है, महादलित-मुस्लिम-कोयरी-कुर्मी. अगर उनका यह गणित सफल हो जाता है तो इसमें कोई शक नहीं कि उन्हें आने वाले कई सालों तक बिहार की कुर्सी से कोई डिगा नहीं पायेगा. मगर..
      इंजीनियरिंग के छात्र रह चुके नीतीश इस बात को भूल रहे हैं कि राजनीति के गणित हर सवाल के दो जवाब होते हैं. यहां अत्यधिक सफलता और विफलता के बीच ज्यादा फासला नहीं होता. सफलता की राह कई बार नेताओं को विफलता के गड्ढे में भी ले जाती है.

    • मगर इस बार नहीं जब उन्होंने गुजरात को उनका पैसा लौटा दिया. इस बार पहली बार वे ईमानदार या दमदार नहीं बल्कि स्वार्थी नजर आ रहे हैं. इस बार लोगों की सहानुभूति मोदी की ओर है और भाजपा की ओर. उनकी इस चाल से ओछेपन की बू आ रही है. गुजरात के एक वेबसाइट ने मोदी के उस पुराने बयान को उद्धृत किया है, जिसके मुताबिक नीतीश ने ही कोसी आपदा  के दौरान मोदी से 5 करोड़ मांगे थे.

      नीतीश को अब कोसी वासियों की सहानुभूति भी शायद ही मिले क्योंकि उनकी सरकार ने गुजरात को यह कहते हुए पैसा वापस किया कि इस पैसा का उपयोग नहीं हो पाया. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस पैसे का उपयोग क्यों नहीं हुआ. बिहार केंद्र  के सामने बार-बार कोसी और काल बैशाखी पीड़ितों के लिए मदद का रोना रोता रहता है और मुख्यमंत्री राहत कोश में करोड़ों बिना खर्च हुए बचे रह जाते हैं आखिर क्यों!


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