Monday, January 4, 2010

महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar): हिन्दू “नाबालिग” लड़की भगाना शरीयत के मुताबिक जायज़ है? तथा दीप प्रज्जवलित करना “गैर-इस्लामिक” है? : पढ़िये दो सेकुलर खबरें… Shariat, Islamic Personal Law, E Ahmed, Pseudo Secularism

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    • यदि कोई व्यक्ति किसी नाबालिग लड़की को भगाकर ले जाये और शादी कर ले तो उसे भारतीय कानून और संविधान के तहत सजा हो सकती है, ये सामान्य सी बात लगभग सभी जानते हैं, लेकिन अगर कोई मुसलमान, किसी नाबालिग हिन्दू लड़की को भगाकर “निकाह” कर ले तो यह जायज़ है… कोलकाता हाईकोर्ट ऐसा मानता है, जबकि मैं समझता था कि नाबालिग लड़की भगाना गैर-ज़मानती अपराध है।
    • 1) क्या इससे यह साबित माना जाये कि कोई मुस्लिम लड़का यदि हिन्दू नाबालिग को भगाकर शादी (या निकाह जो भी हो) कर ले तब भारतीय कानून उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता? क्योंकि उनका अपना पर्सनल लॉ है।

      2) क्या मुस्लिम निकाहनामे में नाबालिग से शादी करना गुनाह नहीं है?

      3) एक देश में दो कानून कब तक चलेंगे?

      4) सुना है कि देश में “महिला आयोग” नाम की एक चिड़िया है वो क्या कर रही है?

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