Friday, October 9, 2009

अयोध्या फिर बनने लगी भगवा ब्रिगेड का मुख्यालय

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    • पांच साल बाद रामबारात, बीस साल बाद शिलापूजन, और न जाने कितने साल बाद शीर्ष सन्तों का ऐसा जमावड़ा। कोई खुलकर नहीं कहता, लेकिन अयोध्या में अरसे बाद विश्व हिन्दू परिषद की गतिविधियों में इजाफा खुद-ब-खुद बहुत कुछ कह रहा है। कयास लगाये जा रहे हैं कि हिन्दी बेल्ट में भाजपा को विश्वसनीयता के संकट से उबारने का कोई और उपाय कामयाब न होते देख संघ परिवार दुबारा उसी 'राम मन्दिर' की शरण में जाने की तैयारी कर रहा है, जिसने पिछले दशक में संघ के स्वयंसेवकों को 'दिल्ली' और 'लखनऊ' के सत्ता सिंहासनों तक पहुंचाया था।
    • अयोध्या में सरगर्मी की शुरुआत 21 अक्टूबर को ही हो जाएगी, जब संघ परिवार द्वारा आयोजित विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा वहां पहुंचेगी। चार से सात नवंबर तक विहिप खेमे के सन्त हंसदास महाराज [हरिद्वार] अपने गुरुदेव की पुण्यतिथि पर वहां विराट सन्त सम्मेलन आयोजित करेंगे। इस सम्मेलन में शंकराचार्यो सहित देश भर के जाने-माने सन्त शामिल होंगे।
    • इसके तुरन्त बाद नौ से ग्यारह नवंबर तक विहिप द्वारा 'शिलापूजन' कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले अयोध्या में नौ नवंबर, 1989 को शिलापूजन व शिलान्यास कार्यक्रम हुए थे।
    • नवंबर में ही अयोध्या में अलग-अलग कार्यक्रमों के सिलसिले में पुरी के शंकराचार्य निश्चलानन्द सरस्वती, उडपी के माधवाचार्य स्वामी विश्वेषतीर्थ, स्वामी राम भद्राचार्य व कई अन्य शीर्ष सन्त मौजूद रहेंगे। संभावना है कि ये सन्त राम शिलापूजन में भी शामिल होंगे। इसी कड़ी में अयोध्या में पांच साल बाद रामबारात की परंपरा दुबारा शुरू होने जा रही है, जिसमें स्थानीय सन्त बारह नवम्बर को रामबारात लेकर जनकपुरी [नेपाल] के लिए रवाना होंगे। विहिप मंत्री पुरुषोत्तम नारायण सिंह बताते हैं कि अगले साल 14 जनवरी तक पूरा संघ परिवार विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा में जुटा रहेगा। इसके बाद होने वाला हरिद्वार कुंभ कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। श्री सिंह ने बताया कि कुंभ में देश भर के सन्तों की जुटान के बीच चार से छह अप्रैल तक विहिप मार्गदर्शक मंडल की बैठक व सन्त सम्मेलन आयोजित किये जाएंगे, जिनमें अन्य मुद्दों के अलावा सन्तों द्वारा राम मन्दिर निर्माण के बारे में भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय किये जाने की संभावना है।