Wednesday, March 3, 2010

मकबूल फिदा हुसैन के समर्थन में आई रुदालियां अब कहां हैं? | भारतीय नागरिक - Indian Citizen

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    • "तस्लीमा का कहना है सोमवार को कर्नाटक में जो हुआ उससे मैं सदमे में हूं। मुझे पता चला है कि कर्नाटक के एक अखबार में मेरे नाम से छपे एक लेख के बाद ये बवाल हुआ है। लेकिन मैं कहना चाहती हूं कि जिंदगी में मैंने कभी किसी कन्नड़ अखबार के लिए लेख नहीं लिखा। ये लेख निंदनीय है। मैंने कभी नहीं लिखा कि पैगंबर मोहम्मद साहब बुर्के के खिलाफ थे। इसलिए ये एक फर्जी कहानी है जिसके जरिए लोग समाज में दुश्मनी फैलाने में जुटे हुए हैं।इस लेख के छपने के बाद राज्य में दंगे भड़के जिसमें दो लोगों की मौत हो गई जबकि 8 लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। होली के दिन प्रदर्शनकारियों ने तस्लीमा के विरोध में जुलूस निकालते हुए दुकानों को आग लगाई। सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाते हुए बसों और ऑटो पर भी पत्थर फेंके। जिसके बाद पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। इसमें एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया जिसने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया।

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